इतना भी स्वार्थी मत बंजाओ की अपने भी गैर हो जाए,
जिन्दगी कुछ पल की है मेरे दोस्त, इसे मुस्कुराकर यूंही बिताये।
वह पल ही क्या जो हम अपनों के साथ ना बिठाये,
जिन्दगी कुछ पल की है मेरे दोस्त, इसे यूंही जाया मत होने देना।
मुश्किल घड़ी हर एक के जीवन में आती है, यूंही मत मुह मोड़ रहना,
जिन्दगी कुछ पल की है मेरे दोस्त, इसे संजोये रखना।
कोशिश करते रहना की सांस तब तक रुके न तब तक यह दिल धड़कता रहे,
जिन्दगी कुछ पल की है मेरे दोस्त, इसे हर एक रूह में बस जाना है तुम्हे।
अपने लिए तो सभी जीते है, कभी गैरों के लिए भी जीकर देखना,
ज़िन्दगी कुछ पल की है मेरे दोस्त, असली मज़ा तभी है जब गैर भी अपने हो जाए।
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good one man very deep and thought provoking.. keep it up..awesome..
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